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IAS Trend Analysis

UPSC Prelims Cut off Marks
The prelims cut off marks refer to the minimum marks required in the GS Paper I to qualify for the mains (provided candidates score at least 33% in the CSAT). This cut off mark changes every year depending upon the performance of the candidates and the number of vacancies.
 
Category 2018 2017
General 98 105.34
OBC 96.66 102.66
SC 84 88.6
ST 83.34 88.6
PwBD-1 73.34 85.34
PwBD-2 53.34 61.34
PwBD-3 40 40
Prelims GS Paper Trend Analysis Subject Wise
 

उपरोक्त चित्र में अंकित डाटा से यह स्पष्ट होता है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी में विगत वर्षों में आये हुए प्रश्नों की संख्या 2011 में सर्वाधिक 19 प्रश्न, 2013 में 11, 2014 में 13 और 2019 में 13 साथ ही न्यूनतम प्रश्नों की संख्या विगत वर्षों में 2017 में 4, 2015 में 7, 2018 में 7 और 2016 में 8 आए। इस तथ्य से स्पष्ट होता है कि प्रश्नों की संख्या घटती बढ़ती रहती है, 2019 में सरल प्रश्नों के संख्या 2 तथा कठिन प्रश्नों की संख्या 5 और अत्यधिक कठिन प्रश्नों की संख्या 5 रही है। प्रश्नों की प्रकृति एवं प्रवृत्ति देखने से यह स्पष्ट होता है कि समसामयिकी का महत्व अधिक रहा है तथा नवाचार, गवर्नेंस एवं नवीन तकनीकियों पर आधारित प्रश्नों के आने की संभावना अधिक रहती है तथा सरकार द्वारा लिये गए नीतियों एवं बनायी गयी योजनाओं में प्रयुक्त हुई तकनीकि जैसे JAM (JanDhan, Aadhaar, Mobile) BAPU (Biometrically Authenticated Physical Uptake)।
 
 From the data mentioned in the above picture, it is clear that the number of questions in the past years in science and technology is the highest in 2011 i.e.19 questions , 11 in 2013, 13 in 2014 and 13 in 2019 and minimum number of questions in 2017 is 4, 7 in 2015, 7 in 2018 and 8 in 2016. It is clear from the fact that the number of questions keeps fluctuating. In 2019 the number of easy questions is 2 and the number of medium questions is 5 and the number of difficult questions is 5.
 It is clear from the nature and trend of the questions that the importance of current affairs is more and the nature of questions are based on innovation, governance and new technologies like the techniques used in the policies and schemes made by the government like JAM (JanDhan, Aadhaar, Mobile) BAPU (Biometrically Authenticated Physical Uptake).
उपरोक्त चित्र में अंकित डाटा से यह स्पष्ट होता है कि अर्थव्यवस्था में विगत वर्षों में 2011 में सर्वाधिक प्रश्नो की संख्या 19 थी, 2016 में 18, 2018 में 16, 2019 में 16 और 2013 में 15 साथ ही न्यूनतम प्रश्नों की संख्या विगत वर्षों में 2017 में 8, 2014 में 10, 2015 में 13 और 2012 में 13 आए हुए हैं। इस तथ्य से स्पष्ट होता है कि प्रश्नों की संख्या घटती बढ़ती रहती है, 2019 में सरल प्रश्नों की संख्या 5 तथा कठिन प्रश्नों की संख्या 6 और अत्यधिक कठिन प्रश्नों की संख्या 5 रही है। प्रश्नों की प्रकृति एवं प्रवृत्ति देखने से यह स्पष्ट होता है कि समसामयिकी का महत्व अधिक रहा है तथा Budget , Economic Survey पर आधारित प्रश्नों के आने की प्रकृति अधिक रहती है तथा सरकार द्वारा लाये गए नीतियों एवं बनायी गई योजनाओं में प्रयुक्त हुई शब्दावलियों एवं संकल्पनों पर आधारित प्रश्न आते रहे है। उपरोक्त बातों से यह स्पष्ट है कि इस खण्ड में नवीन नीतियों, योजनाओं पर अधिक ध्यान देने की अवश्यकता है साथ ही UPSC द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम पर विश्लेषणात्मक तरीकों से चिंतन करने की आवश्यकता है।
 
It is clear from the data indicated in the above picture that the maximum number of questions in the past years in the economy are 19 questions in 2011, 18 in 2016, 16 in 2018, 16 in 2019 and 15 in 2013. It is clear from the fact that the number of questions keeps fluctuating, in 2019 the number of easy questions is 5, the number of medium types is 6 and the number of difficult questions is 5.
 
Looking at the nature and trend of questions, it is clear that the importance of current affairs, Budget Economic Survey and questions based on terminologies used in policies and schemes made by government are more.
It is clear from the above that there is a need to pay more attention to new policies, schemes in this section, as well as syllabus prescribed by UPSC in analytical ways.
उपरोक्त चित्र में अंकित डाटा से यह स्पष्ट होता है कि पर्यावरण-पारिस्थितिकी में विगत वर्षों में 2019 में सर्वाधिक प्रश्नो की संख्या 20 थी, 2016 में 18, 2014 में 17 और 2011 में 15 साथ ही न्यूनतम प्रश्नों की संख्या विगत वर्षों 2015 में 10, 2012 में 12, 2013 में 13 और 2018 में 13 इस तथ्य से स्पष्ट होता है कि प्रश्नों की संख्या घटती बढ़ती रहती है, 2019 में सरल प्रश्नों के संख्या 4 तथा कठिन प्रकार के प्रश्नों की संख्या 9 और अत्यधिक कठिन प्रश्नों की संख्या 7 रही है। प्रश्नों की प्रकृति एवं प्रवृत्ति देखने से यह स्पष्ट होता है की समसामयिकी का महत्व अधिक रहा है राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय समाचारों एवं इसमें प्रयुक्त तकनीति और संकल्पना पर आधारित प्रश्नों के आने की प्रकृति अधिक रहती है। उपरोक्त बातों से यह स्पष्ट है कि इस खण्ड में नवीन नीतियों, योजनाओं, संकल्पनाओं, मुख्य शब्दावलियों पर अधिक ध्यान देने की अवश्यकता है साथ ही UPSC द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम पर विश्लेषणात्मक तरीकों से चिंतन करने की आवश्यकता है।
 
From the data mentioned in the above picture, it is clear that the maximum number of questions in the past years in Environment and ecology is 20 questions in 2019, 18 in 2016, 17 in 2014 and 15 in 2011 and the minimum number of questions in previous years are 10 in 2015, 12 in 2012, 13 in 2013 and 13 in 2018. It is clear from the fact that the number of questions keeps fluctuating, in 2019 the number of easy questions is 4 and the number of medium types is 9 and the number of difficult questions is 7.
It is clear from the nature and tendency of the questions that the importance of current affairs is more and the nature of the questions are based on national and international news stories and the technology and concepts used in it. It is clear from the above that this section requires more attention to new policies, plans, concepts, key terminology and also needs to focus on syllabus prescribed by UPSC in analytical ways.
परोक्त चित्र में अंकित डाटा से यह स्पष्ट होता है कि राजव्यवस्था में विगत वर्षों में 2017 में सर्वाधिक प्रश्नो की संख्या 22 थी, 2015 में 13, 2013 में 13, 2018 में 13 और 2019 में 13 साथ ही न्यूनतम प्रश्नों की संख्या विगत वर्षों में 2016 में 7, 2014 में 11 और 2012 में 11 आए। 2019 में सरल प्रश्नों के संख्या 5 तथा कठिन प्रकार के प्रश्नों की संख्या 6 और अत्यधिक कठिन प्रश्नों की संख्या 2 रही है।

प्रश्नों की प्रकृति एवं प्रवृत्ति देखने से यह स्पष्ट होता है कि समसामयिकी एवं पाठ्यक्रम के महत्वपूर्ण भागों पर आधारित प्रश्नों के आने की प्रवृत्ति अधिक रही है। उपरोक्त बातों से यह स्पष्ट है कि इस खण्ड में नवीन नीतियों, योजनाओं, संकल्पनाओं, मुख्य शब्दावलियों पर अधिक ध्यान देने की अवश्यकता है साथ ही UPSC द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम पर विश्लेषणात्मक तरीकों से चिंतन करने की आवश्यकता है।

 
From the data mentioned in the above picture, it is clear that the maximum number of questions in the past years in the polity is 22 questions in 2017, 13 in 2015, 13 in 2013, 13 in 2018 and 13 in 2019 as well as the minimum number of questions are 7 in 2016, 11 in 2014 and 11 in 2012 over the years. In 2019, the number of easy questions is 5, the number of medium types is 6 and the number of difficult questions is 2.
 
Seeing the nature and tendency of questions, it is clear that the tendency of the questions based on current affairs and important parts of the syllabus. This section requires more attention to new policies, plans, concepts, key terminology and also needs to focus on the syllabus prescribed by UPSC in analytical ways.
उपरोक्त चित्र में अंकित डाटा से यह स्पष्ट होता है कि इतिहास में विगत वर्षों 2012 में सर्वाधिक प्रश्नो की संख्या 12 थी, 2014 में 17 और 2019 में 16 साथ ही न्यूनतम प्रश्नों की संख्या विगत वर्षों में 2011 में 11, 2013 में 11, 2015 में 14, 2017 में 14 और 2018 में 15 आए। इस तथ्य से स्पष्ट होता है कि प्रश्नों की संख्या घटती बढ़ती रहती है, 2019 में आधुनिक भारत का इतिहास प्रश्नों की संख्या 6 मध्यकालीन भारत का इतिहास प्रश्नों की संख्या 5, प्राचीन भारत का इतिहास प्रश्नों की संख्या 3, कला एवं संस्कृति का इतिहास से प्रश्नों की संख्या 2 रही है। उपरोक्त बातों से यह स्पष्ट है कि इस खण्ड में संकल्पनाओं, मुख्य शब्दावलीयों पर अधिक ध्यान देने की अवश्यकता है साथ ही UPSC द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम पर विश्लेषणात्मक तरीकों से चिंतन करने की आवश्यकता है।
 
Data indicated in the above picture depicts that the maximum number of questions in the past years in history is 17 questions in 2012, 17 in 2014 and 16 in 2019 and minimum number of questions in previous years is 11 in 2011, 11 in 2013, 14 in 2015, 14 in 2017 and 15 in 2018. It is clear from the fact that the number of questions keeps fluctuating, in 2019 number of questions from Modern History were 6, 5 questions from Medieval History,3 questions from Ancient History and 2 questions from Art and Culture.
 
It is clear from the above that this section requires more attention to concepts, key terminology and also need to focus on the syllabus prescribed by UPSC in analytical ways.
उपरोक्त चित्र में अंकित डाटा से यह स्पष्ट होता है कि भूगोल में विगत वर्षों में 2015 में सर्वाधिक प्रश्नो की संख्या 14 थी, 2014 में 12 और 2012 में 12 साथ ही न्यूनतम प्रश्नों की संख्या विगत वर्षों में 2016-17 में 7, 2018-19 में 8, 2013 में 9 और 2011 में 11 आए। इस तथ्य से स्पष्ट होता है कि प्रश्नों की संख्या घटती बढ़ती रहती है, 2019 में सरल प्रश्नों के संख्या 0 तथा कठिन प्रकार के प्रश्नों की संख्या 3 और अत्यधिक कठिन प्रश्नों की संख्या 5 रही है। प्रश्नों की प्रकृति एवं प्रवृत्ति देखने से यह स्पष्ट होता है कि समसामयिकी एवं पाठ्यक्रम पर आधारित प्रश्नों की आने की प्रवृत्ति अधिक रही है। उपरोक्त बातों से यह स्पष्ट है कि इस खण्ड में संकल्पनाओं, मुख्य शब्दावलियों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है साथ ही UPSC द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम पर विश्लेषणात्मक तरीकों से चिंतन करने की आवश्यकता है।
 
It is clear from the data indicated in the above picture that the number of questions in Geography in the past years is the highest in 2015 i.e. 14 questions in 2015, 12 in 2014 and 12 in 2012 and the minimum number of questions are 7 in 2016-17 , 8 in 2018-19, 9 in 2013 and 11 in 2011. It is clear from the fact that the number of questions keeps fluctuating In 2019 the number of easy questions is 0 and the number of medium types is 3 and the number of difficult questions is 5. Nature and nature of questions.
 
It is clear from the above that this section requires more attention to concepts, key terminology and also need to focus on the syllabus prescribed by UPSC in analytical ways.
उपरोक्त चित्र में अंकित डाटा से यह स्पष्ट होता है कि समसामयिकी में विगत वर्षों में आये हुए प्रश्नों की संख्या सर्वाधिक 2017 में 34 प्रश्न है, 2015 में 29, 2013 में 28, 2018 में 28 और 2016 में 27 साथ ही न्यूनतम प्रश्नों की संख्या विगत वर्षों में 2011 में 13, 2019 में 15 और 2014 में 20 आए। इस तथ्य से स्पष्ट होता है कि प्रश्नों की संख्या घटती बढ़ती रहती है, 2019 में सरल प्रश्नों के संख्या 4 तथा कठिन प्रकार के प्रश्नों की संख्या 5 और अत्यधिक कठिन प्रश्नों की संख्या 6 रही है। प्रश्नों की प्रकृति एवं प्रवृत्ति देखने से यह स्पष्ट होता है कि समसामयिकी का महत्व अधिक रहा है राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय समाचारों एवं इसमें प्रयुक्त तकनीकी शब्दावलियों एवं संकल्पना पर आधारित प्रश्नों के आने प्रकृति अधिक रहती है। उपरोक्त बातों से यह स्पष्ट है कि इस खण्ड में संकल्पनाओं, मुख्य शब्दावलीयों पर अधिक ध्यान देने की अवश्यकता है साथ ही UPSC द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम पर विश्लेषणात्मक तरीकों से चिंतन करने की आवश्यकता है।
 
From the data mentioned in the above picture, it is clear that the maximum number of questions in current year in current affairs is 34 questions in 2017, 29 in 2015, 28 in 2013, 28 in 2018 and 27 in 2016 and minimum number of questions are 13 in 2011, 15 in 2019 and 20 in 2014 over the years. In 2019 the number of easy questions is 4 and the number of medium questions is 5 and the number of difficult questions is 6.
 
Seeing the nature and tendency of questions, it is clear that the importance of current affairs has been more and the nature of questions is more on the basis of national and international news and the technical terminology and concepts used in it. It is clear from the above that this section requires more attention to concepts, key terminology and also need to focus on the syllabus prescribed by UPSC in analytical ways.